दास्तान है ये की जो पहचानता है खूनी को
वो नौजवान है लौट के आयाकह रही है ज़िंदगी कातिल समझलेउसके सर पे च्छा चुका है मौत का सायाजन्मो की करमो की है कहानी जिसेकहते हैं ओम शांति ओमकहते हैं ओम शांति ओमकहते हैं ओम शांति ओम
दास्तान है ये की जो पहचानता है खूनी को
वो नौजवान है लौट के आयाकह रही है ज़िंदगी कातिल समझलेउसके सर पे च्छा चुका है मौत का सायाजन्मो की करमो की है कहानी जिसेकहते हैं ओम शांति ओमकहते हैं ओम शांति ओमकहते हैं ओम शांति ओम
Write a comment ...
Write a comment ...